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भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी स्तुति लिरिक्स | Bhaye Pragat Kripala Lyrics

भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी स्तुति लिरिक्स | Bhaye Pragat Kripala Lyrics

🪔 भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी स्तुति लिरिक्स - एक नजर में

इष्टदेव / आराध्य: मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम
स्रोत / रचनाकार: गोस्वामी तुलसीदास जी (श्रीरामचरितमानस, बालकाण्ड-192)
राग एवं भाव: वात्सल्य एवं अद्भुत रस / राम जन्मोत्सव छंद
शुभ मुहूर्त / समय: रामनवमी मध्याह्न 12:00 बजे, नित्य प्रातः पूजा अथवा सोहर बधाई

भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी श्रीराम स्तुति के सम्पूर्ण बोल (Hindi & English), वीडियो, शब्दार्थ एवं महत्व।

🎧 भजन श्रवण एवं दर्शन (Listen & Watch Video)

सम्पूर्ण प्रामाणिक भजन बोल (Hindi Lyrics in Devanagari)

भए प्रगट कृपाला दीनदयाला,
कौसल्या हितकारी ।
हरषित महतारी, मुनि मन हारी,
अद्भुत रूप बिचारी ॥

लोचन अभिरामा, तनु घनस्यामा,
निज आयुध भुजचारी ।
भूषन बनमाला, नयन बिसाला,
सोभासिंधु खरारी ॥

कह दुइ कर जोरी, अस्तुति तोरी,
केहि बिधि करूं अनंता ।
माया गुन ग्यानातीत अमाना,
वेद पुरान भनंता ॥

करुना सुख सागर, सब गुन आगर,
जेहि गावहिं श्रुति संता ।
सो मम हित लागी, जन अनुरागी,
भयउ प्रगट श्रीकंता ॥

ब्रह्मांड निकाया, निर्मित माया,
रोम रोम प्रति बेद कहै ।
मम उर सो बासी, यह उपहासी,
सुनत धीर मति थिर न रहै ॥

उपजा जब ग्याना, प्रभु मुसुकाना,
चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै ।
कहि कथा सुहाई, मातु बुझाई,
जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै ॥

माता पुनि बोली, सो मति डोली,
तजहु तात यह रूपा ।
कीजै सिसुलीला, अति प्रियसीला,
यह सुख परम अनूपा ॥

सुनि बचन सुजाना, रोदन ठाना,
होइ बालक सुरभूपा ।
यह चरित जे गावहिं, हरिपद पावहिं,
ते न परहिं भवकूपा ॥

दोहा:
बिप्र धेनु सुर संत हित,
लीन्ह मनुज अवतार ।
निज इच्छा निर्मित तनु,
माया गुन गो पार ॥

- तुलसीदास रचित, रामचरित मानस, बालकाण्ड-192

English Transliteration (Lyrics in English)

Shri Ram Avatar stuti popularly used as badhai, sohar and birthday occasions.Bhaye Pragat Kripala Deendayala,
Kausalya Hitkari ।
Harashit Mahatari, Muni Mana Hari,
Adbhut Roop Bichari ॥

Lochan Abhirama, Tanu Ghanasyama,
Nij Aayudh Bhujchari ।
Bhushan Banmala, Nayan Bisala,
Sobhasindhu Kharari ॥

Kah Dui Kar Jori, Astuti Tori,
Kehi Bidhi Karun Ananta ।
Maya Gun Gyanateet Amana,
Ved Puran Bhananta ॥

Karuna Sukh Sagar, Sab Gun Aagar,
Jehi Gavahin Shruti Santa ।
So Mam Hit Lagi, Jan Anuragi,
Bhayau Pragat Shreekanta ॥

Brahmand Nikaya, Nirmit Maya,
Rom Rom Prati Bed Kahay ।
Mam Ur so Basi, Yah Upahasi,
Sunat Dhir Mati Thir Na Rahay ॥

Upaja Jab Gyana, Prabhu Musukana,
Charit Bahut Bidhi Keenh Chahay ।
Kahi Katha Suhaee, Maatu Bujhaee,
Jehi Prakaar Sut Prem Lahay ॥

Mata Puni Boli, so Mati Doli,
Tajahu Taat Yah Roopa ।
Keejay Sisulila, Ati Priyasila,
Yah Sukh Param Anupa ॥

Suni Bachan Sujaana, Rodan Thaana,
Hoi Balak Surabhoopa ।
Yah Charit Je Gavahin, Haripad Pavahin,
Te Na Parahin Bhavakoopa ॥

Bhaye Pragat Kripala, Deendayala,
Kausalya Hitakari ।
Harashit Mahatari, Muni Mana Hari,
Adbhut Roop Bichari ॥

भावार्थ एवं आध्यात्मिक रहस्य (Spiritual Meaning)

श्री रामअवतार स्तुति का पावन भावार्थ:

चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को जब अयोध्या में भगवान श्री हरि का प्राकट्य हुआ, तो वे सर्वप्रथम माता कौशल्या के सम्मुख अपने परम अलौकिक चतुर्भुज रूप में प्रकट हुए। उनके नयनों में कमल जैसी कांति थी, मेघों जैसा श्यामल वर्ण था और करकमलों में शंख, चक्र, गदा और पद्म सुशोभित थे।

माता कौशल्या प्रभु के इस विराट ब्रह्मांडव्यापी रूप को देखकर विस्मय और आनंद के सागर में डूब गईं। उन्होंने दोनों हाथ जोड़कर स्तुति की—'हे दीनदयाला! आपके रोम-रोम में कोटि-कोटि ब्रह्मांड समाए हैं, फिर आप मेरे उदर से जन्मे हैं, यह बात ज्ञानीजनों की बुद्धि को भी चकित कर देती है।' माता ने प्रभु से प्रार्थना की कि वे अपने ऐश्वर्य रूप को समेटकर एक अबोध शिशु का रूप धारण करें, ताकि वे उन्हें अपनी गोद में लेकर वात्सल्य प्रेम का रसपान कर सकें। कृपानिधान प्रभु तुरंत एक नन्हे बालक बनकर रोने लगे।

पाठ एवं गायन के नियम व लाभ (Benefits & Guidelines)

  • संतान सुख एवं कुल की उन्नति: इस स्तुति के नियमित पाठ से घर में सुयोग्य संतान का आगमन होता है और कुल की कीर्ति बढ़ती है।
  • भय एवं संशय का नाश: भगवान के कृपालु और दीनदयाल रूप का स्मरण मन के सभी भयों को दूर करता है।
  • रामनवमी अनुष्ठान: रामनवमी के दिन दोपहर 12 बजे इस स्तुति का सस्वर पाठ करने से सहस्र गुना पुण्य फल प्राप्त होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)

प्रश्न: 'भए प्रगट कृपाला' स्तुति के रचयिता कौन हैं और यह किस ग्रंथ में है?

उत्तर:इस दिव्य स्तुति के रचयिता महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जी हैं और यह श्रीरामचरितमानस के बालकाण्ड (दोहा 192 के उपरांत छंद) में संकलित है।

प्रश्न: यह स्तुति किस समय गाई जानी चाहिए?

उत्तर:यह स्तुति चैत्र शुक्ल नवमी (रामनवमी) को मध्याह्न ठीक 12 बजे भगवान राम के जन्मोत्सव पर गाई जाती है। नित्य प्रातः पूजा में भी इसका पाठ मंगलकारी है।

प्रश्न: माता कौशल्या ने प्रभु से शिशु बनने का आग्रह क्यों किया था?

उत्तर:माता कौशल्या प्रभु के चतुर्भुज ऐश्वर्य रूप को देखकर संकोच में पड़ गई थीं। वे पुत्र सुख और वात्सल्य रस की अनुभूति के लिए प्रभु को नन्हा शिशु देखना चाहती थीं।

प्रश्न: इस स्तुति के नित्य पाठ से क्या फल मिलता है?

उत्तर:इसके पाठ से गृह क्लेश मिटते हैं, घर में शांति, मर्यादा और मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का आशीर्वाद सदा बना रहता है।

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Spiritual Curiosity Author
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आध्यात्मिक जिज्ञासा

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