राधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र लिरिक्स | Radha Kripa Kataksh Lyrics in Hindi & English

🪔 राधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र लिरिक्स - एक नजर में
राधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र के सम्पूर्ण प्रामाणिक बोल (Devanagari & English Lyrics), वीडियो, भावार्थ, पाठ विधि एवं आध्यात्मिक फल।
🎧 भजन श्रवण एवं दर्शन (Listen & Watch Video)
सम्पूर्ण प्रामाणिक भजन बोल (Hindi Lyrics in Devanagari)
मुनीन्द्र–वृन्द–वन्दिते त्रिलोक–शोक–हारिणि
प्रसन्न-वक्त्र-पण्कजे निकुञ्ज-भू-विलासिनि
व्रजेन्द्र–भानु–नन्दिनि व्रजेन्द्र–सूनु–संगते
कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम् ॥१॥अशोक–वृक्ष–वल्लरी वितान–मण्डप–स्थिते
प्रवालबाल–पल्लव प्रभारुणांघ्रि–कोमले ।
वराभयस्फुरत्करे प्रभूतसम्पदालये
कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम् ॥२॥
अनङ्ग-रण्ग मङ्गल-प्रसङ्ग-भङ्गुर-भ्रुवां
सविभ्रमं ससम्भ्रमं दृगन्त–बाणपातनैः ।
निरन्तरं वशीकृतप्रतीतनन्दनन्दने
कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम् ॥३॥
तडित्–सुवर्ण–चम्पक –प्रदीप्त–गौर–विग्रहे
मुख–प्रभा–परास्त–कोटि–शारदेन्दुमण्डले ।
विचित्र-चित्र सञ्चरच्चकोर-शाव-लोचने
कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम् ॥४॥
मदोन्मदाति–यौवने प्रमोद–मान–मण्डिते
प्रियानुराग–रञ्जिते कला–विलास – पण्डिते ।
अनन्यधन्य–कुञ्जराज्य–कामकेलि–कोविदे
कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम् ॥५॥
अशेष–हावभाव–धीरहीरहार–भूषिते
प्रभूतशातकुम्भ–कुम्भकुम्भि–कुम्भसुस्तनि ।
प्रशस्तमन्द–हास्यचूर्ण पूर्णसौख्य –सागरे
कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम् ॥६॥
मृणाल-वाल-वल्लरी तरङ्ग-रङ्ग-दोर्लते
लताग्र–लास्य–लोल–नील–लोचनावलोकने ।
ललल्लुलन्मिलन्मनोज्ञ–मुग्ध–मोहिनाश्रिते
कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम् ॥७॥
सुवर्णमलिकाञ्चित –त्रिरेख–कम्बु–कण्ठगे
त्रिसूत्र–मङ्गली-गुण–त्रिरत्न-दीप्ति–दीधिते ।
सलोल–नीलकुन्तल–प्रसून–गुच्छ–गुम्फिते
कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम् ॥८॥
नितम्ब–बिम्ब–लम्बमान–पुष्पमेखलागुणे
प्रशस्तरत्न-किङ्किणी-कलाप-मध्य मञ्जुले ।
करीन्द्र–शुण्डदण्डिका–वरोहसौभगोरुके
कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम् ॥९॥
अनेक–मन्त्रनाद–मञ्जु नूपुरारव–स्खलत्
समाज–राजहंस–वंश–निक्वणाति–गौरवे ।
विलोलहेम–वल्लरी–विडम्बिचारु–चङ्क्रमे
कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम् ॥१०॥
अनन्त–कोटि–विष्णुलोक–नम्र–पद्मजार्चिते
हिमाद्रिजा–पुलोमजा–विरिञ्चजा-वरप्रदे ।
अपार–सिद्धि–ऋद्धि–दिग्ध–सत्पदाङ्गुली-नखे
कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम् ॥११॥
मखेश्वरि क्रियेश्वरि स्वधेश्वरि सुरेश्वरि
त्रिवेद–भारतीश्वरि प्रमाण–शासनेश्वरि ।
रमेश्वरि क्षमेश्वरि प्रमोद–काननेश्वरि
व्रजेश्वरि व्रजाधिपे श्रीराधिके नमोस्तुते ॥१२॥
इती ममद्भुतं-स्तवं निशम्य भानुनन्दिनी
करोतु सन्ततं जनं कृपाकटाक्ष-भाजनम् ।
भवेत्तदैव सञ्चित त्रिरूप–कर्म नाशनं
लभेत्तदा व्रजेन्द्र–सूनु–मण्डल–प्रवेशनम् ॥१३॥
राकायां च सिताष्टम्यां दशम्यां च विशुद्धधीः ।
एकादश्यां त्रयोदश्यां यः पठेत्साधकः सुधीः ॥१४॥
यं यं कामयते कामं तं तमाप्नोति साधकः ।
राधाकृपाकटाक्षेण भक्तिःस्यात् प्रेमलक्षणा ॥१५॥
ऊरुदघ्ने नाभिदघ्ने हृद्दघ्ने कण्ठदघ्नके ।
राधाकुण्डजले स्थिता यः पठेत् साधकः शतम् ॥१६॥
तस्य सर्वार्थ सिद्धिः स्याद् वाक्सामर्थ्यं तथा लभेत् ।
ऐश्वर्यं च लभेत् साक्षाद्दृशा पश्यति राधिकाम् ॥१७॥
तेन स तत्क्षणादेव तुष्टा दत्ते महावरम् ।
येन पश्यति नेत्राभ्यां तत् प्रियं श्यामसुन्दरम् ॥१८॥
नित्यलीला–प्रवेशं च ददाति श्री-व्रजाधिपः ।
अतः परतरं प्रार्थ्यं वैष्णवस्य न विद्यते ॥१९॥
English Transliteration (Lyrics in English)
munīndra–vṛnda–vandite triloka–śoka–hāriṇi
prasanna-vaktra-paṇkaje nikuñja-bhū-vilāsini
vrajendra–bhānu–nandini vrajendra–sūnu–sṁgate
kadā kariṣyasīha māṁ kṛpākaṭākṣa–bhājanam ॥१॥aśoka–vṛkṣa–vallarī vitāna–maṇḍapa–sthite
pravālabāla–pallava prabhāruṇāṁghri–komale ।
varābhayasphuratkare prabhūtasampadālaye
kadā kariṣyasīha māṁ kṛpākaṭākṣa–bhājanam ॥२॥
anaṅga-raṇga maṅgala-prasaṅga-bhaṅgura-bhruvāṁ
savibhramṁ sasambhramṁ dṛganta–bāṇapātanaiḥ ।
nirantarṁ vaśīkṛtapratītanandanandane
kadā kariṣyasīha māṁ kṛpākaṭākṣa–bhājanam ॥३॥
taḍit–suvarṇa–campaka –pradīpta–gaura–vigrahe
mukha–prabhā–parāsta–koṭi–śāradendumaṇḍale ।
vicitra-citra sañcaraccakora-śāva-locane
kadā kariṣyasīha māṁ kṛpākaṭākṣa–bhājanam ॥४॥
madonmadāti–yauvane pramoda–māna–maṇḍite
priyānurāga–rañjite kalā–vilāsa – paṇḍite ।
ananyadhanya–kuñjarājya–kāmakeli–kovide
kadā kariṣyasīha māṁ kṛpākaṭākṣa–bhājanam ॥५॥
aśeṣa–hāvabhāva–dhīrahīrahāra–bhūṣite
prabhūtaśātakumbha–kumbhakumbhi–kumbhasustani ।
praśastamanda–hāsyacūrṇa pūrṇasaukhya –sāgare
kadā kariṣyasīha māṁ kṛpākaṭākṣa–bhājanam ॥६॥
mṛṇāla-vāla-vallarī taraṅga-raṅga-dorlate
latāgra–lāsya–lola–nīla–locanāvalokane ।
lalallulanmilanmanojña–mugdha–mohināśrite
kadā kariṣyasīha māṁ kṛpākaṭākṣa–bhājanam ॥७॥
suvarṇamalikāñcita –trirekha–kambu–kaṇṭhage
trisūtra–maṅgalī-guṇa–triratna-dīpti–dīdhite ।
salola–nīlakuntala–prasūna–guccha–gumphite
kadā kariṣyasīha māṁ kṛpākaṭākṣa–bhājanam ॥८॥
nitamba–bimba–lambamāna–puṣpamekhalāguṇe
praśastaratna-kiṅkiṇī-kalāpa-madhya mañjule ।
karīndra–śuṇḍadaṇḍikā–varohasaubhagoruke
kadā kariṣyasīha māṁ kṛpākaṭākṣa–bhājanam ॥९॥
aneka–mantranāda–mañju nūpurārava–skhalat
samāja–rājahṁsa–vṁśa–nikvaṇāti–gaurave ।
vilolahema–vallarī–viḍambicāru–caṅkrame
kadā kariṣyasīha māṁ kṛpākaṭākṣa–bhājanam ॥१०॥
ananta–koṭi–viṣṇuloka–namra–padmajārcite
himādrijā–pulomajā–viriñcajā-varaprade ।
apāra–siddhi–ṛddhi–digdha–satpadāṅgulī-nakhe
kadā kariṣyasīha māṁ kṛpākaṭākṣa–bhājanam ॥११॥
makheśvari kriyeśvari svadheśvari sureśvari
triveda–bhāratīśvari pramāṇa–śāsaneśvari ।
rameśvari kṣameśvari pramoda–kānaneśvari
vrajeśvari vrajādhipe śrīrādhike namostute ॥१२॥
itī mamadbhutṁ-stavṁ niśamya bhānunandinī
karotu santatṁ janṁ kṛpākaṭākṣa-bhājanam ।
bhavettadaiva sañcita trirūpa–karma nāśanṁ
labhettadā vrajendra–sūnu–maṇḍala–praveśanam ॥१३॥
rākāyāṁ ca sitāṣṭamyāṁ daśamyāṁ ca viśuddhadhīḥ ।
ekādaśyāṁ trayodaśyāṁ yḥ paṭhetsādhakḥ sudhīḥ ॥१४॥
yṁ yṁ kāmayate kāmṁ tṁ tamāpnoti sādhakḥ ।
rādhākṛpākaṭākṣeṇa bhaktiḥsyāt premalakṣaṇā ॥१५॥
ūrudaghne nābhidaghne hṛddaghne kaṇṭhadaghnake ।
rādhākuṇḍajale sthitā yḥ paṭhet sādhakḥ śatam ॥१६॥
tasya sarvārtha siddhiḥ syād vāksāmarthyṁ tathā labhet ।
aiśvaryṁ ca labhet sākṣāddṛśā paśyati rādhikām ॥१७॥
tena sa tatkṣaṇādeva tuṣṭā datte mahāvaram ।
yena paśyati netrābhyāṁ tat priyṁ śyāmasundaram ॥१८॥
nityalīlā–praveśṁ ca dadāti śrī-vrajādhipḥ ।
atḥ paratarṁ prārthyṁ vaiṣṇavasya na vidyate ॥१९॥
भावार्थ एवं आध्यात्मिक रहस्य (Spiritual Meaning)
राधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र का दिव्य भावार्थ:
यह स्तोत्र सनातन भक्ति परम्परा का एक परम गूढ़ और गोपनीय रत्न है। स्वयं देवाधिदेव महादेव शिव ने जगतजननी पार्वती जी को इस स्तोत्र का उपदेश दिया था। स्तोत्र के प्रत्येक पद में श्री राधा रानी के अलौकिक सौन्दर्य, उनकी करुणामयी चितवन, उनके नूपुरों की मधुर झंकार और श्रीकृष्ण के मन को आकर्षित करने वाली उनकी त्रिभंगिमा का अत्यंत हृदयस्पर्शी चित्रण है।
स्तोत्र का मूल सार यह है कि भगवान श्रीकृष्ण की पूर्ण कृपा केवल तभी प्राप्त हो सकती है जब श्री राधा रानी की कृपा दृष्टि (कृपा कटाक्ष) साधक पर पड़ जाए। जब भक्त दैन्य भाव से इस स्तोत्र का गान करता है, तो उसके अंतःकरण के समस्त विकार धुल जाते हैं और उसे वृंदावन के नित्य निकुंज रस का अलौकिक अनुभव होता है।
पाठ एवं गायन के नियम व लाभ (Benefits & Guidelines)
- एकाग्रता एवं शुद्धि: प्रातः स्नानादि के उपरांत पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
- पापों का शमन: इस स्तोत्र के नित्य पाठ से तीनों तापों (दैहिक, दैविक, भौतिक) का शमन होता है।
- श्रीकृष्ण कृपा की प्राप्ति: श्री राधा जी की कृपा से साधक को भगवान श्रीकृष्ण का अनन्य प्रेम सहज ही सुलभ हो जाता है।
- विशेष तिथियाँ: शुक्ल पक्ष की अष्टमी, पूर्णिमा अथवा एकादशी को इसका 11 बार पाठ करना अत्यंत कल्याणकारी माना गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)
प्रश्न: राधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र के मूल रचयिता कौन हैं?
उत्तर:यह पावन स्तोत्र ब्रह्माण्ड पुराण के ऊर्ध्वाम्नाय तंत्र से उद्धृत है, जिसे स्वयं भगवान शिव ने माता पार्वती को उपदेश स्वरूप सुनाया था।
प्रश्न: राधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र का पाठ करने का सबसे शुभ समय क्या है?
उत्तर:प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में अथवा सायंकाल की आरती के समय इसका पाठ करना सर्वोत्तम है। राधाष्टमी, शरद पूर्णिमा और प्रत्येक एकादशी पर इसका पाठ विशेष फलदायी होता है।
प्रश्न: इस स्तोत्र के नियमित पाठ से क्या आध्यात्मिक लाभ होते हैं?
उत्तर:इसके पाठ से मन को परम शांति मिलती है, भय और चिंताओं का नाश होता है तथा भक्त को श्री राधा-कृष्ण की नित्य निकुंज सेवा और प्रेमाभक्ति की प्राप्ति होती है।
प्रश्न: क्या गृहस्थ साधक भी इस स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं?
उत्तर:हाँ, कोई भी श्रद्धालु स्त्री अथवा पुरुष पवित्र भाव और निष्ठा के साथ इस स्तोत्र का नियमित पाठ कर सकता है।

A sanctuary dedicated to authentic inquiry into Yoga, Tantra, Pranayama, and Vedic scriptures. Guided by classical texts and sincere spiritual seekers.
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